*जिंदगी*
*****
रूठ गयी जिंदगी हमसे
कबतक किनारा करें हम
वक्त ने ये क्या तस्वीर बनायी
जिंदादिली
याद बनके रूह में समां गयी...
जमाना गुजरता गया
यादें गहरी आहट में उभर आयी.
जिंदगी का आना
और यकायक रूठ जाना
दीपक
किसीका बुझाकर
चले जाना ...
क्या उसूल है जीवन का....
तकदीर ने अरमानों को
मिटाकर रख दिया..
जिंदगी
थोडा और जीना देती
जीवन की नैय्या किनारे
पार कर लेने देती..
सागर की
गहराईयों को
आगोश में भरकर समां तो जाती
प्यारी जिंदगी...
✍️©® *अनिता कलसकर*
*कल्याण*
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रूठ गयी जिंदगी हमसे
कबतक किनारा करें हम
वक्त ने ये क्या तस्वीर बनायी
जिंदादिली
याद बनके रूह में समां गयी...
जमाना गुजरता गया
यादें गहरी आहट में उभर आयी.
जिंदगी का आना
और यकायक रूठ जाना
दीपक
किसीका बुझाकर
चले जाना ...
क्या उसूल है जीवन का....
तकदीर ने अरमानों को
मिटाकर रख दिया..
जिंदगी
थोडा और जीना देती
जीवन की नैय्या किनारे
पार कर लेने देती..
सागर की
गहराईयों को
आगोश में भरकर समां तो जाती
प्यारी जिंदगी...
✍️©® *अनिता कलसकर*
*कल्याण*
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